वह स्वीकार करते हैं कि यहां से भाजपा को एक मुद्दा मिला. इसके अलावा वह
सारदा घोटाले का भी ज़िक्र करते हैं. वह कहते हैं कि सिर्फ़ सांप्रदायिकता
मुद्दा नहीं है बल्कि टीएमसी की 'विनाशकारी नीतियां' मुद्दा हैं.
हाल ही में ख़त्म हुए मतदानों के बीच पश्चिम बंगाल से हिंसा की ख़बरें भी आती रहीं. यहां तक कि आख़िरी चरण में चुनाव प्रचार को प्रचार अभियान की समयसीमा तक घटानी पड़ी.
चुनावी हिंसा का दोष तृणमूल कांग्रेस पर लगाते हुए भाजपा नेता राहुल सिन्हा कहते हैं कि हिंसा की एक भी घटना भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से नहीं हुई.
वह कहते हैं, "आरोप तो कोई भी लगा सकता है. सरकार और पुलिस ममता बनर्जी की है. वे आरोप साबित तो करें. सभी मस्तान गुंडे और शस्त्रधारी ममता बनर्जी के साथ हैं. वही लोग लोगों को मार रहे हैं."
क्या पश्चिम बंगाल के वामपंथी कार्यकर्ताओं ने इस बार भाजपा को समर्थन दिया है?
इस सवाल पर राहुल सिन्हा कहते हैं, "वामपंथियों में जो गुंडा तत्व थे वो पहले ही टीएमसी की तरफ़ चले गए थे. बाक़ी लोग जो निराश होकर बैठे थे, वे हमारे साथ आने लगे. तृणमूल कांग्रेस को स्थापित करने वाले कई लोग भी हमारे साथ आए हैं. मोदी जी का प्रगति का मार्ग तो जादू की तरह काम कर ही रहा है बल्कि ममता जी का विनाश का मार्ग भी उनके विनाश के लिए जादू की तरह काम कर रहा है. इसीलिए भाजपा को पश्चिम बंगाल में भयंकर सफलता मिलने वाली है."
वह मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में उनके लिए सिर्फ़ तृणमूल कांग्रेस ही एक चुनौती है. कांग्रेस की लड़ाई बचने की और सीपीएम की लड़ाई ज़िंदा रहने की है, जबकि भाजपा जीतने की लड़ाई लड़ रही है.
पश्चिम बंगाल में कुल 42 लोकसभा सीटें हैं जिनमें से 34 पर अब तक ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस काबिज़ थी, जबकि भाजपा के पास सिर्फ़ दो सीटें थीं.
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतिम चरण का चुनाव प्रचार ख़त्म होने के बाद केदारनाथ पहुंचे थे. मौक़ा बुद्ध पूर्णिमा का था. जिसके बाद उनकी कई तस्वीरें वायरल हो गईं.
तस्वीर के वायरल होने की कई वजहें रहीं. एक ओर जहां विपक्ष ने कहा कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है वहीं प्रधानमंत्री ने 17 घंटे बाद गुफ़ा से बाहर निकलते ही चुनाव आयोग को धन्यवाद कहा कि आयोग ने उन्हें एकांत में ध्यान लगाने का वक़्त दिया.
यहां तक की वेबसाइट पर ख़ुद भी इसके लिए कई जगह होटल शब्द का इस्तेमाल किया है.
इस गुफा का नाम रूद्र ध्यान गुफा है.
क्या है क़ीमत
बीएल राणा बताते हैं कि अभी तो इसकी क़ीमत 990 रुपये ही रखी गई है लेकिन आने वाले वक़्त में ये क़ीमत बदल भी सकती है और यह पूरी तरह लोगों के रिस्पॉन्स पर निर्भर करेगी.
हालांकि शुरुआत में इसकी क़ीमत 3000 रुपये रखी गई थी लेकिन बहुत अधिक लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं थी इसलिए इसकी क़ीमत घटा दी गई.
राणा उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में लोगों की रुचि इस ओर बढ़ेगी.
गढ़वाल मण्डल विकास निगम के अंतर्गत आने वाली यह गुफा केदारनाथ धाम पहाड़ियों से क़रीब एक किलोमीटर ऊपर है. (केदारनाथ मंदिर समुद्रतल से क़रीब 11,500 फ़ीट की ऊंचाई पर है).
इस गुफा का मुंह केदारनाथ मंदिर की ओर खुलता है. इस प्राकृतिक गुफा के बाहरी हिस्से को स्थानीय पत्थरों से तैयार किया गया है और गुफा के मुख्य द्वार पर सुरक्षा के लिए लकड़ी का दरवाज़ा लगा हुआ है.
हाल ही में ख़त्म हुए मतदानों के बीच पश्चिम बंगाल से हिंसा की ख़बरें भी आती रहीं. यहां तक कि आख़िरी चरण में चुनाव प्रचार को प्रचार अभियान की समयसीमा तक घटानी पड़ी.
चुनावी हिंसा का दोष तृणमूल कांग्रेस पर लगाते हुए भाजपा नेता राहुल सिन्हा कहते हैं कि हिंसा की एक भी घटना भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से नहीं हुई.
वह कहते हैं, "आरोप तो कोई भी लगा सकता है. सरकार और पुलिस ममता बनर्जी की है. वे आरोप साबित तो करें. सभी मस्तान गुंडे और शस्त्रधारी ममता बनर्जी के साथ हैं. वही लोग लोगों को मार रहे हैं."
क्या पश्चिम बंगाल के वामपंथी कार्यकर्ताओं ने इस बार भाजपा को समर्थन दिया है?
इस सवाल पर राहुल सिन्हा कहते हैं, "वामपंथियों में जो गुंडा तत्व थे वो पहले ही टीएमसी की तरफ़ चले गए थे. बाक़ी लोग जो निराश होकर बैठे थे, वे हमारे साथ आने लगे. तृणमूल कांग्रेस को स्थापित करने वाले कई लोग भी हमारे साथ आए हैं. मोदी जी का प्रगति का मार्ग तो जादू की तरह काम कर ही रहा है बल्कि ममता जी का विनाश का मार्ग भी उनके विनाश के लिए जादू की तरह काम कर रहा है. इसीलिए भाजपा को पश्चिम बंगाल में भयंकर सफलता मिलने वाली है."
वह मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में उनके लिए सिर्फ़ तृणमूल कांग्रेस ही एक चुनौती है. कांग्रेस की लड़ाई बचने की और सीपीएम की लड़ाई ज़िंदा रहने की है, जबकि भाजपा जीतने की लड़ाई लड़ रही है.
पश्चिम बंगाल में कुल 42 लोकसभा सीटें हैं जिनमें से 34 पर अब तक ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस काबिज़ थी, जबकि भाजपा के पास सिर्फ़ दो सीटें थीं.
लोकसभा चुनाव ख़त्म हो चुके हैं और अब इंतज़ार सिर्फ़ नतीजों का है.
हालांकि
इस दौरान एग्ज़िट पोल के क़यास को जहां बीजेपी दावों की हक़ीकत बता रही है
वहीं विपक्ष का कहना है कि एग्ज़िट पोल सिर्फ़ क़यास मात्र ही हैं. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतिम चरण का चुनाव प्रचार ख़त्म होने के बाद केदारनाथ पहुंचे थे. मौक़ा बुद्ध पूर्णिमा का था. जिसके बाद उनकी कई तस्वीरें वायरल हो गईं.
तस्वीर के वायरल होने की कई वजहें रहीं. एक ओर जहां विपक्ष ने कहा कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है वहीं प्रधानमंत्री ने 17 घंटे बाद गुफ़ा से बाहर निकलते ही चुनाव आयोग को धन्यवाद कहा कि आयोग ने उन्हें एकांत में ध्यान लगाने का वक़्त दिया.
यहां तक की वेबसाइट पर ख़ुद भी इसके लिए कई जगह होटल शब्द का इस्तेमाल किया है.
इस गुफा का नाम रूद्र ध्यान गुफा है.
- इसके भीतर बिजली और पीने के पानी की व्यवस्था है.
- सुबह की चाय, सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना, शाम की चाय और रात का खाना उपलब्ध कराया जाता है. हालांकि ये सारी चीज़ें एक नियत समय पर ही उपलब्ध कराई जाती हैं लेकिन आग्रह करके समय बदलवाया जा सकता है.
- यह गुफा पूरी तरह से एकांत में रहने के लिए बनाई गई है लेकिन आपातकाल की स्थिति में गढ़वाल मण्डल विकास निगम के मैनेजर से संपर्क किया जा सकता है.
- इस गुफा में एक घंटी भी लगी हुई है. जो गुफा के पास मौजूद अटेंडेंट को बुलाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.
- कोई भी शख़्स इस गुफा को कम से कम तीन दिन के लिए बुक करा सकता है
- जो शख़्स बुकिंग करा रहा है उसे बुकिंग की तारीख़ से दो दिन पहले गढ़वाल मण्डल विकास निगम गुप्तकाशी में रिपोर्ट करना ज़रूरी है. पहले गुप्तकाशी में और उसके बाद केदारनाथ में बुकिंग कराने वाले शख़्स की मेडिकल जांच की जाएगी और अगर उसे मेडिकली और फ़िजिकली फ़िट पाया गया तभी उसे गुफ़ा में ठहरने की अनुमति दी जाएगी.
- एक बार में एक ही शख़्स इस गुफा में रुक सकता है
- एकबार अगर आपने बुकिंग कर ली तो बुकिंग कैंसिल कराने के बाद आपको रिफंड नहीं मिलेगा. चाहे वजह कुछ भी हो.
- सिर्फ़ और सिर्फ़ गढ़वाल मण्डल विकास निगम की वेबसाइट से ही यहां के लिए बुकिंग हो सकती है.
- नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट या सेल्फ़ डिक्लेयरेशन फॉर्म भरना ज़रूरी है.
क्या है क़ीमत
बीएल राणा बताते हैं कि अभी तो इसकी क़ीमत 990 रुपये ही रखी गई है लेकिन आने वाले वक़्त में ये क़ीमत बदल भी सकती है और यह पूरी तरह लोगों के रिस्पॉन्स पर निर्भर करेगी.
हालांकि शुरुआत में इसकी क़ीमत 3000 रुपये रखी गई थी लेकिन बहुत अधिक लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं थी इसलिए इसकी क़ीमत घटा दी गई.
राणा उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में लोगों की रुचि इस ओर बढ़ेगी.
गढ़वाल मण्डल विकास निगम के अंतर्गत आने वाली यह गुफा केदारनाथ धाम पहाड़ियों से क़रीब एक किलोमीटर ऊपर है. (केदारनाथ मंदिर समुद्रतल से क़रीब 11,500 फ़ीट की ऊंचाई पर है).
इस गुफा का मुंह केदारनाथ मंदिर की ओर खुलता है. इस प्राकृतिक गुफा के बाहरी हिस्से को स्थानीय पत्थरों से तैयार किया गया है और गुफा के मुख्य द्वार पर सुरक्षा के लिए लकड़ी का दरवाज़ा लगा हुआ है.